Friday, January 3, 2020

ZAFARNAMA IN HINDI ज़फरनामा हिंदी

प्रभु सभी गुणों में परिपूर्ण हैं। वह अजम अमर व दयालु उदार है। वह हमारा उद्धारकर्ता 
व सृष्टि को पोषण देने वाले हैं । 1
वह रक्षक और सहायक है; वह करुणामय, अन्नदाता और लुभायमान है 2
वह अधिपति गुणों का खान व मार्गदर्शक है; वह अद्वितीय है और निरंकार व 
गुण अवगुण रहित है 3 
अपनी उदारता के माध्यम से, वह किसी को धन, सेना , संपत्ति के बिना भी
 स्वर्गीय आनंद प्रदान करता है 4 
वह सर्वोत्तम, सर्वव्यापी है उनके होने से यह जगत सम्मान सम्मानित है 5 
वह पवित्र, उदार और रक्षा करने वाला है; वह दयालु और विजयों का प्रदाता है 6
प्रभु उदार है, सबसे उससे बडा कोई नहीं है; वह रक्षक है उससे सुंदर कोई नहीं है 7
प्रभु सर्वज्ञ हैं, शरणागत के रक्षक हैं  वह गरीबों का मित्र, शत्रुओं का नाश 
करने वाला है 8
वह धर्म के रक्षक, सभी गुणों का स्रोत है; वह सब कुछ जानता है और सभी शास्त्रों 
का स्रोत है 9
वह पूर्ण और बुद्धि के दाता है वह सर्वव्यापी प्रभु, सर्वज्ञ है 10
ब्रह्मांड के मालिक, जिनसे सभी ज्ञान जन्मते है वे दुख की गांठों को तोड़ते हैं 11
वह सर्वोच्च सबसे पूज्यनीय समस्त ब्रह्माँड का मालिक सभी प्रकार के 
ज्ञान का स्रोत है 12 
मुझे तुम्हारी कसमों पर भरोसा है; प्रभु स्वयं साक्षी है 13
लेकिन मुझे ऐसे व्यक्ति पर विश्वास नहीं है, जिसके अधिकारियों ने सत्य का मार्ग 
त्याग दिया है 14 
तुम्हारी कुरान की शपथ पर जो कोई विश्वास रखता है, उसे बाद में उसका मूल्य 
चुकाना पडता है। 15  
वह, जो महान हुमा की छाया में आता है, बहुत बहादुर कौवा भी उसे नुकसान नहीं 
पहुंचा सकता 16
(एक कल्पित पक्षी जो केवल माँस खाता है और जिसके सिर पर इसकी छाया पड़ जाये वह राजा हो जाता है) 
वह , जो भयंकर बाघ की शरण लेता है; बकरी, भेड़ और हिरण उसके पास नहीं जाते। 17 
अगर मैंने छुप कर भी कुरान की शपथ ली होती, तो मैं अपनी जगह से एक इंच भी
नहीं हिलता 18 
युद्ध में चालीस अकालग्रस्त लोग कैसे लड़ सकते थे, जिन पर दस लाख सैनिकों 
ने अचानक हमला किया था 19 
आपकी सेना ने शपथ को तोड़ते हुए और बड़ी जल्दबाजी में युद्ध के मैदान में तीर 
और तोपों से हमला किया 20
इस कारण से, मुझे हस्तक्षेप करना पड़ा और पूरी तरह से सशस्त्र आना पड़ा 21
जब अन्य सभी विधियां विफल हो जाती हैं, तो तलवार को हाथ में पकड़ना उचित है 22 
मुझे कुरान पर आपकी कसमों पर कोई विश्वास नहीं है,अन्यथा इस लड़ाई
 से मेरा कोई लेना-देना नहीं था 23
मुझे नहीं पता कि आपके अधिकारी धोखेबाज हैं, अन्यथा मैं उनका विश्वास कर 
इस रास्ते पर नहीं चलता 24
उन लोगों को कैद करने और मारने उचित नहीं है, जो कुरान की शपथ पर विश्वास 
करते हैं 25
लेकिन आपकी सेना के जवान, काली वर्दी में लिपटे, मेरे आदमियों पर मक्खियों 
की तरह दौड़ पड़े 26
उनमें से जो भी किले की दीवार के पास आया, मेरे एक तीर से वह अपने रक्त में 
भीग गया 27
किसी ने दीवार के पास आने की हिम्मत नहीं की जिसने भी सामना किया उसका 
मेरे तीर ने नाश कर दिया 28
जब मैंने नाहर खान को युद्ध के मैदान में देखा, तो उसे भी मेरे एक तीर ने 
सलाम किया गया 29
उन सभी नाविकों को जो दीवार के पास आए, उन्हें कुछ ही समय में 
परलोक भेज दिया गया 30
धनुष और तीर के साथ एक और अफगान बाढ़ की तरह युद्ध के मैदान में आया 31
उसने पूरी वीरता से अंधाधुंध बदहवास होकर बेतहाशा तीर चलाए 32
उसने कई हमले किए लेकिन वह भी अपने लहू से भीग गया। 33
ख़्वाजा मर्दूद ने खुद को दीवार के पीछे छिपा लिया उसने एक बहादुर योद्धा 
की तरह मैदान में प्रवेश नहीं किया 34
अगर मैंने उसका चेहरा एक बार देखा होता, तो मेरा एक तीर उसे भी मौत के घाट उतार देता 35
दोनों ओर के युद्ध में तीर और बर्छियों से घायल हुए कई योद्धा मारे गए 36
तीरों की इतनी हिंसक रूप से बौछार की गई थी, कि मैदान खसखस के खेत ​​
की तरह लाल हो गया 37
खेल में गेंद और डंडे की तरह मृतकों के सिर और अंग मैदान में बिखरे हुए थे 38
जब तीर फुफकारता और उछलता था, तो ओर हंसी होती और दूसरी ओर रोना था 39
वहाँ भाले और वीरों की गर्जना की भयानक आवाज थी जिससे योद्धाओं के 
होश खो दिए 40
यह देखना चाहिये था कि मैदान में बहादुरी से सामना कैसे किया जा सकता था, 
जब केवल चालीस ही असंख्य योद्धाओं से घिरे थे 41 
जब दुनिया का चिराग खुद ही बुझ गया, तो चाँद रात में चमकने लगा 42
वह, जो कुरान की शपथ पर विश्वास रखता है, सच्चा भगवान उसे मार्गदर्शन देता है 43
न तो कोई नुकसान था और न ही चोट; मेरे भगवान व शत्रुओं नाशक योद्धा , 
मुझे सुरक्षा के लिए लाए 44
मुझे नहीं पता था कि ये शपथ तोड़ने वाले धोखेबाज और मैमन के फूल थे। 45
वे न तो विश्वास के आदमी थे, और न ही इस्लाम के सच्चे अनुयायी, वे नहीं जानते 
थे कि प्रभु को भी उनपर भरोसा नहीं था 46
वह, जो ईमानदारी के साथ अपने विश्वास का पालन करता है, वह कभी भी 
अपनी कसम से एक इंच भी नहीं हिलता है 47
मुझे ऐसे व्यक्ति पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं है, जिसके लिए कुरान की 
शपथ का कोई महत्व नहीं है 48
यदि तुम कुरान के नाम पर सौ बार शपथ लेते हैं, तो भी मुझे तुम पर 
अधिक भरोसा नहीं होगा 49
यदि तुम्हें ईश्वर में थोड़ी भी आस्था है, तो युद्ध के मैदान में पूरी तरह से सशस्त्र आएं 50
कुरान की शपथ लेकर बोले गये शब्दों का पालन करना तुम्हारा कर्तव्य है, 
तुम्हारे लिये कुरान भगवान के आदेश हैं 51
यदि तुम्हारे पैगंबर स्वयं वहां होते, तो शपथ का पूरे दिल से पालन करते। 52
कुरान की शपथ को पूरा करना हर मुस्लिम का कर्तव्य है 53
मुझे तुम्हारा दिया पत्र और संदेश प्राप्त हुआ है, जिसमें लिखा था कि इस सब को 
रोकने के लिये करो, जो भी करना आवश्यक है 54
उन शब्दों पर पालन होनी चाहिए  कथन के अनुरूप कार्य होना चाहिए 55
मैं क़ाज़ी द्वारा बताए गए शब्दों से सहमत हूं, लेकिन अगर तुम सही रास्ते पर 
आने का वादा करते हैं 56
यदि तुम शपथ पत्र देखना चाहते हैं, तो मैं आपको तुरंत भेज सकता हूं 57
अगर तुम खुद कांगर गांव में आते हैं, तो हम एक-दूसरे से मिल सकते हैं 58
अपने मन में वहाँ आने के खतरे को मत लाओ; क्योंकि बरार समुदाय मेरे आदेशों
 के अनुसार काम करता है 59
हम एक दूसरे से इस तरह से बात कर सकते हैं; आओ जिससे हम सीधी बात कर सकें 60
तुम्हारा यह कहना कि मैं आपके लिए एक हज़ार रुपए का बहुत अच्छा जुर्माना 
ला सकता हूं और इस क्षेत्र को तुमसे जागीर के रूप में प्राप्त कर सकता हूं, 
तुम इस बात को अपने दिमाग में रख सकते हैं 61
मैं सर्वोच्चसत्ता के मालिक और उसके भक्तों का दास हूँ अगर उसकी इच्छा है, 
तो मैं खुद को वहां प्रस्तुत करूंगा  62
यदि उसकी इच्छा हुई, तो मैं वहां उपस्थित रहूंगा 63
यदि आप एक अल्लाह की पूजा करते हैं, तो आप मेरे इस काम में कोई देरी नहीं करेंगे 64
तुम परवरदिगार को पहचानो ,  उसे पहचानने से तुम किसी को 
कडवा न बोलोगे, किसी को चोट न पहुंचाओगे ।65
तुम बडे राजा हो सिंहासन पर बैठते हो, लेकिन मुझे आपके अन्याय
क्रूरतापूर्ण कृत्यों पर आश्चर्य होता है 66
मुझे तुम्हारी धार्मिकता और न्याय के कार्यों पर आश्चर्य है; मैं तुम्हारी 
महानता पर को नहीं मानता 67
मुझे तुम्हारी ईश्वरीय आस्थाओं पर में बहुत संदेह है  सत्य के विरूद्ध कही गई बात पतन 
की ओर ले जाती है 68
असहाय पर अपनी तलवार से प्रहार मत कर, नहीं तो विधाता तेरे लहू के एक एक 
कतरे को बहा देगा 69
उस विधाता के प्रति गुनाहगार मत बन, ईश्वर को पहचान जो तृष्णा और 
मिथ्याभिमान से दूर है 70
वह, बादशाहों का बादशाह  जिसे कोई भय छू नहीं सकता  वह अनंत ब्रह्माँड मालिक है 71
वह, सच्चा बादशाह स्वर्ग और नर्क दोनों दुनिया का मालिक है वह ब्रह्मांड के 
सभी प्राणियों का निर्माता है।72
वह चींटी से लेकर हाथी तक सभी का रक्षक है वह असहाय को शक्ति देता है और 
अधर्मी को नष्ट करता है  73
उस सच्चे बादशाह को असहायों के रक्षक के रूप में जाना जाता है वह चिंतामुक्त 
और चाह से मुक्त है 74
वह अपराजित है उसकी महिमा अपरंपार है वह हमें में सच्चा रास्ता दिखाता है 75
तू कुरान की कसम खा रहा हैं इसलिए आपने वादे को पूरा कर 76
तुम्हारे लिये यही ठीक रहेगा कि तुम अपने कहे का गंभीरता से पालन करो77 
क्या हुआ अगर तुने मेरे चार बेटों को मार दिया है, तुझे फन फैलाए नाग अभी भी 
डस रहा है। 78 
आग को बुझाने के लिये चिंगारी को हवा देना किस प्रकार की बहादुरी है। 79
 “जल्दबाजी की क्रिया काम शैतान का है “ फिरदौसी के इस कथन को याद कर  80
मैं तेरे अल्लाह के घर से भी हो आया हूं, जो न्याय के दिन गवाह होंगे 81
यदि तू अपने आप को नेक काम के लिए तैयार करता है, तो ऊपरवाला तुझे 
उसका इनाम देगा 82
अगर तू नइंसाफ के इस कार्य को भूल जाते हैं, तो परवरदिगार तुझे भूल जाएगा 83 
सच्चे धर्मी को सच्चाई और सदाचार के मार्ग पर चलना चाहिए, लेकिन तुम्हारे 
लिये प्रभु को पहचानना अभी भी जरूरी है 84 
मुझे विश्वास है कि वह मनुष्य प्रभु को पहचानता है, जो अपनी कर्म से दूसरों की 
भावनाओं को आहत करता है 85 
सच्चा और दयालु भगवान तुमसे प्यार नहीं करता, भलेही तेरे पास अकूत संपत्ति हो 86 
भले ही तुम कुरान द्वारा सौ बार शपथ लेलो, मैं कभी भी तुमपर विश्वास नहीं करूंगा 87
मैं तुम्हारे पास नहीं आ सकता और तुम्हारी शपथ के मार्ग पर चलने के लिए तैयार 
नहीं हूँ ।  मैं जाऊँगा, जहाँ भी मेरे भगवान मुझे जाने के लिए कहेंगे 88 
तुम भले ही राजाओ के राजा हो, खुशकिस्मत औरंगजेब तुम एक चतुर प्रशासक 
और एक अच्छे घुड़सवार हो। 89 
अपनी अक्ल और तलवार की मदद से, तुम देग और तेग के मालिक बन गए हो  90 
तुम सौन्दर्य और बुद्धिमानों के मालिक हो तुम प्रधानों के राजा और राजा हो 91 
तुम सौन्दर्य और ज्ञान के मालिक हो तुम साम्राज्य और उसके धन के मालिक  92 
तुम युद्ध के मैदान में सबसे तीक्ष्ण और एक पर्वत की भाँति है तुम उच्च 
शोभायमान राजाओं की तरह हो 93
लेकिन औरंगजेब! तुम धर्म और न्याय से दूर हो 94
मैंने शातिर पहाड़ी प्रमुखों को जीत लिया, वे मूर्तिभंजक थे और मैं उनका भंजक हूं 95 
समय-चक्र को देख, जिसे कोई बदल नहीं सकता जो भी इसे बदलना चाहता है 
यह उ मिटा देता है 96
पवित्र प्रभु की शक्ति के बारे में सोच, जिसके कारण एक व्यक्ति लाखों लोगों को 
मार सकता है (चमकौर युद्ध के परिपेक्ष में) 97
यदि तुम दयालु प्रभु से  कार्य को आगे बढ़ते होतो ईश्वर तुम्हारे अनुकूल है, 
कोई भी दुश्मन कुछ भी नहीं कर सकता 98
वह मुक्तिदाता और मार्गदर्शक है, हमारी जीभ  उसकी प्रशंसा में गाती है 99
कष्ट के समय वह शत्रु की आँखों की रोशनी छीन लेता है बिना कोई तुम्हें 
कष्ट के समय वह शत्रु की आँखों की रोशनी छीन लेता है बिना कोई तुम्हें 
चोट दिये दीनहीन कर पराजित कर देगा 100 
वह, जो सच्चा है और सही मार्ग का अनुसरण करता है, दयालु भगवान उसके 
प्रति अनुग्रहकारी है 101
वह, जो अपने मन और शरीर को उसके प्रति समर्पण करता है, 
सच्चा है भगवान उसके प्रति अनुग्रहशील है 102
 कोई भी शत्रु उस पर कभी भी प्रहार नहीं कर सकता है,
जिस पर दयालु भगवान उसकी कृपा दिखाते हैं 103
जब एक आदमी पर लाख  का हमला होता है, तो उदार ईशवर उसे सुरक्षा देते है 104 
जिस तरह तेरी आशाएं तेरे धन में निहित हैं, मैं प्रभु के अनुग्रह पर निर्भर हूं। 105 
तुझे अपने राज्य और धन पर गर्व है, लेकिन मैं लौकिक भगवान की शरण लेता हूं 106 
इस सच को अनदेखा मत करो कि यह जीवन यह धरती स्थायी निवास नहीं है 107
समय-चक्र को देखें, जिसे कोई बदल नहीं सकता यह दुनियाँ की हर शय को 
बदल सकता है 108
अधीन और असहाय को मत दबा कुरान की शपथ को मत तोड 109
यदि ईश्वर अनुकूल है, तो दुश्मन क्या कर सकता है?, दंड देने में वह नीति 
अनिति नहीं देखता  110 
यदि ईश्वर अनुकूल है तो दुश्मन एक हजार वार दे लेकिन वह एक भी बाल 
को नुकसान नहीं पहुंचा सकता है 111

Wednesday, November 2, 2011

राइट टू रिजेक्ट जैसा कानून पहले से है

भारतवर्ष में चुनावों के समय एक अरब पच्चीस करोड नागरिकों में से औसतन ५० से ५५% अर्थात लगभग अडसठ करोड पचास लाख ही मतदाता ही अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं एवं इनमें से लगभग ३३% अर्थात बाईस करोड अडसठ लाख पिचहत्तर लाख मतदाताओं के मतदान के कारण कोई दल अपने सहयोगियों के साथ सत्ता में आता है ! जो कि लगभग भारतवर्ष की कुल जनसँख्या के १८.२५ % हैं बाकी बचे ४५ से ५०% मतदाताओं में से अधिकांश अपने मताधिकार का प्रयोग इस कारण से नहीं करते क्यूंकि उन्हें लगता है सभी राजनैतिक दलों के प्रत्याशी आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त हैं अथवा पहले से भ्रष्टाचार अथवा व्यभिचार में लिप्त हैं एवं मतदाताओं को यह लगता है कि सभी दुष्टों में से किसी एक दुष्ट को चुनने से अच्छा यह है कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग ना करें परन्तु वे यह भूल जाते हैं कि यह संभव है कि उनके नाम से किसी बेईमान प्रत्याशी का चाटुकार व्यक्ति उनके स्थान पर मताधिकार का प्रयोग कर सकता हैं एसी कीच घटनाएँ पिछले चुनावों में सामने आयीं भी हैं और बहुत से मतदाताओं को यह आशा है कि इस बार अन्ना हजारे के अनशन का समर्थन कर वे लोकपाल ,राईट टू रिकाल अथवा राईट टू रिजेक्ट के विधेयक को पारित करवा लेंगे परन्तु सरकार के प्रतिनिधियों व मंत्रियों के .इन विधेयकों के प्रति रूखे व्यव्हार के कारण यह प्रतीत नहीं होता कि वे ऐसा कोई कठोर विधेयक को पारित करेंगे भी अथवा उनके मूल रूप में पारित करेंगे क्यूंकि ये साधारण जनता के ऐसे अधिकार के रूप में विकसित होंगे जिसका प्रयोग कर सधारण नागरिक इन नेताओं को कठपुतली की समान अपनी उँगलियों पर नचा सकते हैं कौनसा नेता अपने हाथों से से अपने लिए गड्ढा खोदेगा 
परन्तु वर्तमान में एक ऐसा नियम है जिसका प्रयोग कर अपने मत का प्रयोग ना करने वाले तथा भ्रष्ट व्यवस्था से व्यथित नागरिक भी राजनैतिक दलों को विवश कर सकते हैं कि वे अपराधी,व्यभिचारी एवं भ्रष्ट प्रत्याशियों को हटाकर साफ़ एवं स्वच्छ छवि के प्रत्याशी चुनाव में उतारें 


मतदान के समय आप अपने चुनाव क्षेत्र के मतदान अधिकारी से फॉर्म 49-O की मांग करें जिसकी भाषा लगभग यह होगी कि “वर्तमान सभी प्रत्याशी राजनेता बनने के पात्र नहीं हैं इस कारण मैं अपने मत का प्रयोग इन सभी को अपात्र घोषित में करने में करता हूँ “
जो मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करते उनकी जगह किसी प्रत्याशी के समर्थक जाकर मतदान कर देते हैं जिसका लाभ भ्रष्ट प्रत्याशी को मिलता हैं यदि ऐसे मतदाता फॉर्म ४९-ओ का प्रयोग करते हैं तो उनके मत का दुरूपयोग की संभावनाएं समोत हो जाती है

साथ ही अपने क्षेत्र के चुनाव प्रत्याशियों के बारे में जानने की लिए लिखें myneta(रिक्त स्थान) अपने क्षेत्र का पिन कोड अथवा पोस्टल कोड और भेज दें 56070 पर अथवा डायल करें 1800110440आपको अपने क्षेत्र के प्रत्याशियों के बारे में सारी जानकारी मिल जायेगी उनके द्वारा अर्जित संपत्ति ,न्यायालय में कोई वाद चल रहा हो अथवा किसी थाने में कोई एफ.आई.आर है तो सारी जानकारी आपको इन नं पर सन्देश भेज कर अथवा वार्ता कर पता चल सकता है 
साथ यदि फॉर्म ४९-ओ के मतदाताओं की संख्या जीतने वाले प्रत्याशी को मिलने वाले मतों की संख्या से अधिक हो जाती तो उस क्षेत्र के चुनाव निरस्त हो जायेंगे एवं राजनैतिक दलों को नए प्रत्याशी चुनाव में उतारने होंगे इस प्रक्रिया से पुनः चुनावों का व्यय का भर तो साधारण जन पर पडेगा परन्तु वह अगले पांच वर्षों में होने भ्रष्टाचार के माध्यम से होने वाले धन की हानि से कई गुना कम होगा
राइट तो रिजेक्ट में लगभग यही है नए कानून बनाने से बेहतर है कि इसी में एक संशोधन करने कि मांग करी जाये फॉर्म 49-O में मतदाता का नाम लिखाना आवश्यक होता है यदि इसे संशोधित कर अन्य मतदातों की भांति फॉर्म 49-O का प्रयोग करने वाले मतदाताओं के नाम का खुलास ना करने का प्रावधान हो तो यह भी एक सशक्त कानून है जिसका प्रयोग कर राजनीती में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं आपराधिकरण को जड से समाप्त किया जा सकता है

Wednesday, June 22, 2011

खे लेने दो आज नाव ,,कल कर पतवार रहे ना रहे
जीवन सरिता में फिर शायद ये रसधार बहे ना बहे
अंतिम श्वास निकालने तक है "बिस्मिल "की अभिलाषा यही
वैभव तेरा अमर रहे माँ हम दिन चार रहें ना रहें - अमर शहीद पंडित राम प्रसाद "बिस्मिल "

Wednesday, March 30, 2011


डाक्टर वशिष्ठ नारायण सिंह का नाम यदि आप कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में लेंगे तो आपको बहुत ही सम्मान के साथ देखा जायेगा परन्तु विडंबना देखिये भारत में इनके नाम से बहुत ही कम लोग परिचित हैं डाक्टर वशिष्ठ नारायण सिंह किसी समय में भारत में रामानुज की कोटि के गणितज्ञ बनकर उभरे थे।
बिहार के भोजपुर जिला स्थित बसंतपुर गाँव में एक सिपाही के परिवार में 2 अप्रैल 1944 को जन्मे इस गणितज्ञ ने छोटी सी उम्र मे ही अपनी प्रतिभा के बलबूते सभी को हैरान कर दिया था सन् 1962 में नेतरहाच स्कूल से दसवीं की परीक्षा में राज्यस्तर पर प्रथम स्थान मिला इसके बाद इन्होंने पटना साइंस काँलेज में इंटरमीडियेट की के लिये प्रवेश लिया यहीं पर इनकी गणित की विलक्ष्ण प्रतिभा को देख काँलेज के प्रोफेसर चकित रह गये और पटना विश्वविद्यालय की नियमावली में संशोधन कर इन्हें समय से पूर्व ही स्नातक की उपाधी दे दी गयी । इनसे प्रभावित होकर अमेरिका की बर्कले यूनीवर्सिटी के प्रोफेसर केली 1963 भारत आये और छात्रवृति पर उन्हें बर्कली के कैललिफोर्निया विश्वविध्यालय ले गये जहाँ इनकी प्रतिभा के कारण इन्हे जीनियसों का जीनियस के नाम से संबोधित किया जाने लगा। 1969 मे उन्होने कैलीफोर्निया विश्वविघालय मे पी.एच.डी. प्राप्त की। साइकिल वेक्टर स्पेश थ्योरी(Cycle Vector Space Theory) पर किये गए उनके शोध कार्य ने उन्हे भारत और विश्व मे प्रसिद्ध कर दिया।और वहीं से इन्हे डी.लिट की उपाधि घणित के क्षेत्र में किये गये अनुसंधान के कारण मिली। अपनी पढाई खत्म करने के बाद कुछ समय के लिए वे कुछ समय के लिए भारत आएमगर जल्द ही वे अमेरिका वापस चले गए। अमेरिका स्थित यूनिवर्सिटी आफ वाशिंगटन में सितंबर 1969 से जून 1971 तक 1165 डालर की रिसर्च एंड टीचिंग की नौकरी परन्तु देश सेवा के ज़ज्बे कारण वह नौकरी छोडकर आ गये और कानपुर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी में मात्र 800 रुपये पर वर्ष 1971 से 1972 तक रिसर्च एंड टीचिंग का कार्य किया। इसके बाद वर्ष 1972 में ही वे सांख्यिकी संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजीकोलकाता में नौकरी पर चले गए। अमेरिका में उस समय यह वेतन बहुत अच्छा माना जाता था परन्तु भारत में इतने कम वेतन के कारण उनकी पत्नी से अनबन होने लगी और तलाक भी हो गया। यही वह समय था जब उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। सिजो फ्रेनिया रोग की वजह से विक्षिप्त होने पर उनका इलाज डेविड अस्पताल व राजकीय मानसिक आरोग्यशालारांची में कराया गया। इसके बाद वे गांव लौट आए। उन्हे अगस्त 1989 को रांची के एक चिकित्सक से दिखा कर उनके भाई ट्रेन से किर्की (पुणे) ले जा रहे थे। रास्ते में खंडवा स्टेशन पर अगस्त 1989को वे उतर गए और भीड़ में कहीं खो गए। करीब पांच वर्ष तक गुमनाम रहने के बाद उनके गांव के लोगों ने उन्हे छपरा में पाया तो वे गांव लाए गए। इसके बाद राज्य सरकार ने उनकी सुध ली। उन्हे विमहांस बेंगलूर इलाज के लिए भेजा गया। जहां मार्च 1993 से जून 1997 तक इलाज चला। इसके बाद से वे गांव में ही रह रहे थे। तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री शत्रुध्न सिन्हा ने इस बीच उनकी सुध ली थी । स्थिति ठीक नहीं होने पर उन्हे सितंबर 2002 को मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया गया। उस दौरान करीब एक साल दो महीने तक उनका यहां इलाज चला था। स्वास्थ्य में लाभ देखते हुए उन्हें यहां से छुट्टी दे दी गई थी।  उनके भतीजे राकेश का कहना है कि पहले जब उन्हें दिल्ली लाया गया था तब भी वे उनके साथ थेवर्ष 2003 से अब तक वे गांव में ही रहे। छात्रों को उन्होंने पढ़ाया भी लेकिन एकाएक चिड़चिड़ापन आने से उनका व्यवहार बदल गया। .एक बार फिर से बिहार सरकार ने विश्वविख्यात गणितज्ञ के इलाज के लिए पहल की है.विधान परिषद की आश्वासन समिति ने 12 फरवरी ,2009 को पटना में हुई अपनी बैठक में डॉ. सिंह को इलाज के लिए दिल्ली भेजने का निर्णय लिया. समिति के फैसले के आलोक में भोजपुर जिला प्रशासन ने उन्हें रविवार दिनांक 12 अप्रैल ,09 को दिल्ली भेजा.उनके साथ दो डॉक्टर भी भेजे गये हैं. दिल्ली के मेंटल अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों की परामर्श पर उन्हें आगे के खर्च का बंदोबस्त किया जाएगा. स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि दिल्ली में परामर्श के बाद यदि जरूरत पड़ी तो उन्हें विदेश भी ले जाया जा सकता है.अभी वे अपने गाँव बसंतपुर मे उपेक्षित जीवन व्यतीत कर रहे थे. पिछले दिनों आरा में उनकी आंखों में मोतियाबिन्द का सफल ऑपरेशन हुआ था