अनुराग अरोड़ा
Wednesday, June 22, 2011
खे लेने दो आज नाव ,,कल कर पतवार रहे ना रहे
जीवन सरिता में फिर शायद ये रसधार बहे ना बहे
अंतिम श्वास निकालने तक है "बिस्मिल "की अभिलाषा यही
वैभव तेरा अमर रहे माँ हम दिन चार रहें ना रहें - अमर शहीद पंडित राम प्रसाद "बिस्मिल "
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