अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करना भी धर्म है गुरु राम सिंह कूका ने अपने शिष्यों को संकट की घडी में यही प्रेरणा दी १८५७ की क्रांति के बाद कूका विद्रोहियों ने अंग्रेजों से मोर्चे लेने शुरू किये कूका क्रांतिकारियों ने समूचे पंजाब को २२ हिस्सों में विभक्त कर हर हिस्से की ज़िम्मेदारी एक व्यक्ति को सोंपकर अपनी गतिविधियां प्रारंभ की हर अभियान ने पहले क्रन्तिकारी ईश्वर के नाम की हुंकार लगते थे जिसमें ब्रिटिश सरकार के लिए एक चेतावनी हुआ करती थी इसी कूक के कारण ये लोग कूका के नाम से संबोधित किये जाते थे इन लोगों ने ब्रिटिश सरकार की समानांतर व्यवस्थाएं खड़ी कर दी थी जिससे ब्रिटिश सतर्क हो गए और पंजाब में धरपकड शुरू हो गयी और क्रांतिकारियों एक एक १३ साल का बच्चा भी पकड़ा गया गुरुमुख सिंह कूका अंग्रेजों ने सभी क्रांतिकारियों को तोप के मुहँ से बांध कर उड़ने की सजा सुनाई जब गुरुमुख सिंह की बारी आई तो इनकी सुकुमारता और अल्पायु देख कर एक अँगरेज़ महिला ने अँगरेज़ अधिकारी को इनपर दया दिखाने का अनुरोध किया जिससे उसने माना लेकिन एक शर्त के साथ की गुरुमुख सिंह माफ़ी मांगें और ब्रिटिश हुकुमत जिंदाबाद कह यह कहना था की गुरुमुख सिंह का रक्त खोलने लगा और उन्होंने आक्रमण कर दिया उस अधिकारी पर ब्रिटिश की लम्बाई अधिक होने के कारण उसकी दाढ़ी कसकर पकड़ ली और जोर से हुकार भरते हुए कहा कि मैं आज इसे सबक सिखा कर रहूँगा लोगों ने दाढ़ी छुडवाने का भरसक प्रयास किया लेकिन बालक के दिल में देशभक्ति के ज़ज्बे ने एक शक्ति का संचार कर दिए जब सारे प्रयास असफल हो गए तो वीर बालक के हाथ काटकर उस ज़ालिम कि दाढ़ी छुडवा पाए और तलवार से वीर बालक के टुकड़े टुकड़े कर दिए गए शब्द नहीं हैं मेरे पास किन शब्दों में नमन करूँ बस आंसू हैं मेरे पास जिनकी श्रधाँजली देता हूँ ऐसे वीर बालक को
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